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श्लोक  3.255.15 
अस्ति त्वन्यन्महत् सत्रं राजसूयसमं प्रभो॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! एक और महान यज्ञ है जो राजसूय के समान है।
 
Lord! There is another great sacrifice which is equal to the Rajasuya. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)