श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 255: कर्ण और पुरोहितकी सलाहसे दुर्योधनकी वैष्णवयज्ञके लिये तैयारी  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.255.10 
बह्वन्नपानसंयुक्त: सुसमृद्धगुणान्वित:।
प्रवर्ततां महायज्ञस्तवापि भरतर्षभ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘भरतश्रेष्ठ! तुम्हारा यह महायज्ञ भी प्रचुर अन्न और अत्यन्त समृद्धिदायक गुणों से युक्त हो। 10॥
 
‘Bharatshrestha! May your Mahayagya also be filled with abundant food items and very prosperous qualities. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)