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mahabharat 3.254.4-6: तत्पश्चात् उसने उत्तर दिशा में जाकर वहाँ के राजाओं को अपने अधीन कर लिया। भगदत्त को परास्त करके राधानन्दन कर्ण शत्रुओं से युद्ध करता हुआ महान पर्वत हिमालय पर चढ़ गया। वहाँ से वह सब दिशाओं में गया और उसने सब राजाओं को अपने अधीन कर लिया, हिमालय क्षेत्र के समस्त शासकों को जीतकर उनसे कर वसूल किया।॥4-6॥   |   mahabharat अध्याय 3.254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार  »  श्लोक 4-6
 
 
श्लोक  3.254.4-6 
अथोत्तरां दिशं गत्वा वशे चक्रे नराधिपान्॥ ४॥
भगदत्तं च निर्जित्य राधेयो गिरिमारुहत्।
हिमवन्तं महाशैलं युध्यमानश्च शत्रुभि:॥ ५॥
प्रययौ च दिश: सर्वान्नृपतीन् वशमानयत्।
स हैमवतिकान् जित्वा करं सर्वानदापयत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने उत्तर दिशा में जाकर वहाँ के राजाओं को अपने अधीन कर लिया। भगदत्त को परास्त करके राधानन्दन कर्ण शत्रुओं से युद्ध करता हुआ महान पर्वत हिमालय पर चढ़ गया। वहाँ से वह सब दिशाओं में गया और उसने सब राजाओं को अपने अधीन कर लिया, हिमालय क्षेत्र के समस्त शासकों को जीतकर उनसे कर वसूल किया।॥4-6॥
 
Thereafter he went to the north and subdued the kings there. After defeating Bhagadatta, Radhanandan Karna fought with his enemies and climbed the great mountain Himalaya. From there he went to all directions and subjugated all the kings and conquered all the rulers of the Himalaya region and collected taxes from them.॥ 4-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)