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mahabharat 3.254.36: भारत! तब से राजा दुर्योधन और सुबलपुत्र शकुनि को यह विश्वास होने लगा कि पाण्डव युद्ध में कर्ण से हार गये हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.254.36 
तदा प्रभृति राजा च शकुनिश्चापि सौबल:।
जानते निर्जितान् पार्थान् कर्णेन युधि भारत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भारत! तब से राजा दुर्योधन और सुबलपुत्र शकुनि को यह विश्वास होने लगा कि पाण्डव युद्ध में कर्ण से हार गये हैं।
 
Bhaarat! From then on King Duryodhana and Subala's son Shakuni began to believe that the Pandavas had been defeated by Karna in the war.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि कर्णदिग्विजये चतुष्पञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें कर्णदिग्विजयसम्बन्धी दो सौ चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)