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mahabharat 3.254.2-4h: फिर एक महान युद्ध के बाद उसने वीर द्रुपद को परास्त कर लिया और उनसे सोना, चाँदी, नाना प्रकार के रत्न और कर वसूलने के लिए विवश कर दिया। हे महाराज जनमेजय! इस प्रकार द्रुपद को परास्त करके कर्ण ने उसके अनुयायी राजाओं को भी परास्त कर लिया और उनसे भी कर वसूल किया।॥ 2-3 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 254: कर्णके द्वारा सारी पृथ्वीपर दिग्विजय और हस्तिनापुरमें उसका सत्कार  »  श्लोक 2-4h
 
 
श्लोक  3.254.2-4h 
युद्धेन महता चैनं चक्रे वीरं वशानुगम्।
सुवर्णं रजतं चापि रत्नानि विविधानि च॥ २॥
करं च दापयामास द्रुपदं नृपसत्तम।
तं विनिर्जित्य राजेन्द्र राजानस्तस्य येऽनुगा:॥ ३॥
तान् सर्वान् वशगांश्चक्रे करं चैनानदापयत्।
 
 
अनुवाद
फिर एक महान युद्ध के बाद उसने वीर द्रुपद को परास्त कर लिया और उनसे सोना, चाँदी, नाना प्रकार के रत्न और कर वसूलने के लिए विवश कर दिया। हे महाराज जनमेजय! इस प्रकार द्रुपद को परास्त करके कर्ण ने उसके अनुयायी राजाओं को भी परास्त कर लिया और उनसे भी कर वसूल किया।॥ 2-3 1/2॥
 
Then after a great battle he subdued the valiant Drupada and forced him to give gold, silver, various kinds of precious stones and taxes. O great king Janamejaya! After defeating Drupada in this manner, Karna subdued his follower kings and collected taxes from them too.॥ 2-3 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)