vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान
»
श्लोक 7-8h
श्लोक
3.253.7-8h
क्रोशतस्तव राजेन्द्र ससैन्यस्य नृपात्मज॥ ७॥
दृष्टस्ते विक्रमश्चैव पाण्डवानां महात्मनाम्।
अनुवाद
राजेन्द्र! राजकुमार! जब आप अपनी सेना सहित चीख-पुकार मचा रहे थे, तब आपने महान पाण्डवों का पराक्रम भी देखा है।
Rajendra! Prince! When you along with your army were screaming and shouting, you have also witnessed the valour displayed by the great Pandavas. 7 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×