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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान
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श्लोक 6-7h
श्लोक
3.253.6-7h
प्रत्यक्षं तव गान्धारे ससैन्यस्य विशाम्पते॥ ६॥
सूतपुत्रोऽपयाद् भीतो गन्धर्वाणां तदा रणात्।
अनुवाद
'गांधारीनंदन! आपके सामने ही सूतपुत्र कर्ण अपनी सेना सहित गन्धर्वों के भय से युद्धभूमि से भाग गया । 6 1/2॥
‘Gandhari Nandan! In front of you, Suta's son Karna along with his army fled from the battlefield in fear of the Gandharvas. 6 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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