Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.253.4-5h: ‘पिताजी! जब आप तपोवन जा रहे थे, तब भी मैंने यही कहा था और आज भी यही कह रहा हूँ। आपका वहाँ जाना मुझे अच्छा नहीं लगा और वहाँ जाकर आपने जो कुछ किया, वह भी मुझे अच्छा नहीं लगा॥4 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उक्तं तात यथा पूर्वं गच्छतस्ते तपोवनम्॥ ४॥
गमनं मे न रुचितं तव तत्र कृतं च ते।
अनुवाद
‘पिताजी! जब आप तपोवन जा रहे थे, तब भी मैंने यही कहा था और आज भी यही कह रहा हूँ। आपका वहाँ जाना मुझे अच्छा नहीं लगा और वहाँ जाकर आपने जो कुछ किया, वह भी मुझे अच्छा नहीं लगा॥4 1/2॥
‘Father! I had already said this when you were going to Tapovan, and I am saying the same today as well. I did not like you going there and I did not like whatever you did after going there.॥ 4 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥