Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.253.3-4h: वैशम्पायन बोले - महाराज ! पाण्डवों के गन्धर्वों से छुटकारा पाकर जब दुर्योधन विदा होकर हस्तिनापुर पहुँचा और पाण्डव पहले की भाँति वन में जाकर रहने लगे, तब भीष्म ने धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन से यह कहा - ॥3 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं गतेषु पार्थेषु विसृष्टे च सुयोधने।
आगते हास्तिनपुरं मोक्षिते पाण्डुनन्दनै:॥ ३॥
भीष्मोऽब्रवीन्महाराज धार्तराष्ट्रमिदं वच:।
अनुवाद
वैशम्पायन बोले - महाराज ! पाण्डवों के गन्धर्वों से छुटकारा पाकर जब दुर्योधन विदा होकर हस्तिनापुर पहुँचा और पाण्डव पहले की भाँति वन में जाकर रहने लगे, तब भीष्म ने धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन से यह कहा - ॥3 1/2॥
Vaishmpayana said - Maharaj! After the Pandavas got rid of the Gandharvas, when Duryodhana left and reached Hastinapur and the Pandavas went and started living in the forest as before, then Bhishma said this to Duryodhana, son of Dhritarashtra - ॥ 3 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥