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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.253.27 
एवमुक्तस्तदा कर्णो धार्तराष्ट्रेण धीमता।
सर्वमाज्ञापयामास प्रायात्रिकमरिंदम॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! बुद्धिमान दुर्योधन की यह बात सुनकर कर्ण ने यात्रा की सारी आवश्यक तैयारियाँ करने का आदेश दे दिया।
 
O Janamejaya! Upon hearing the wise Duryodhana say this, Karna ordered all the necessary preparations for the journey.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)