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mahabharat 3.253.26: वीरवर! जब आपको विश्वास हो जाए कि आप समस्त शत्रुओं का नाश कर सकते हैं, तब आपको दिग्विजय के लिए प्रस्थान करना चाहिए। आपका कल्याण हो। मुझे आवश्यक व्यवस्था करने की आज्ञा दीजिए॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.253.26 
यदा च मन्यसे वीर सर्वशत्रुनिबर्हणम्।
तदा निर्गच्छ भद्रं ते ह्यनुशाधि च मामिति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वीरवर! जब आपको विश्वास हो जाए कि आप समस्त शत्रुओं का नाश कर सकते हैं, तब आपको दिग्विजय के लिए प्रस्थान करना चाहिए। आपका कल्याण हो। मुझे आवश्यक व्यवस्था करने की आज्ञा दीजिए॥ 26॥
 
Viravar! When you are confident that you can destroy all the enemies then you should travel for Digvijay. May you be blessed. Order me to make the necessary arrangements.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)