श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.253.24 
तच्छ्रुत्वा तु वचो राजन् कर्णस्य भरतर्षभ।
प्रीत्या परमया युक्त: कर्णमाह नराधिप:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ राजन! कर्ण की यह बात सुनकर राजा दुर्योधन ने बड़े हर्ष के साथ उससे कहा- 24॥
 
Bharatshrestha Rajan! Hearing this from Karna, King Duryodhana said to him with great joy – 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)