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mahabharat 3.253.23: महाराज! मुझे आज्ञा दीजिए। आपकी विजय निश्चित है। मैं आपको यह सत्य पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूँ और शस्त्र को छूकर शपथ लेता हूँ। 23.   |   mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.253.23 
अनुजानीहि मां राजन् ध्रुवो हि विजयस्तव।
प्रतिजानामि ते सत्यं राजन्नायुधमालभे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मुझे आज्ञा दीजिए। आपकी विजय निश्चित है। मैं आपको यह सत्य पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूँ और शस्त्र को छूकर शपथ लेता हूँ। 23.
 
King! Give me your orders. Your victory is certain. I tell you this truth with full assurance and swear by touching the weapon. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)