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mahabharat 3.253.20-21: राजन! मैं पर्वतों, वनों और जंगलों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त करूँगा। जिस भूमि पर चारों महाबली पाण्डवों ने मिलकर विजय प्राप्त की है, उसे मैं अकेले आपके लिए ही जीतूँगा, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। कुरुकुल के शत्रु, मिथ्या बुद्धि वाले भीष्म मेरे इस पराक्रम को अपनी आँखों से देखें।   |   mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.253.20-21 
जेष्यामि पृथिवीं राजन् सशैलवनकाननाम्।
जिता च पाण्डवैर्भूमिश्चतुर्भिर्बलशालिभि:॥ २०॥
तामहं ते विजेष्यामि एक एव न संशय:।
सम्पश्यतु सुदुर्बुद्धिर्भीष्म: कुरुकुलाधम:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैं पर्वतों, वनों और जंगलों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त करूँगा। जिस भूमि पर चारों महाबली पाण्डवों ने मिलकर विजय प्राप्त की है, उसे मैं अकेले आपके लिए ही जीतूँगा, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। कुरुकुल के शत्रु, मिथ्या बुद्धि वाले भीष्म मेरे इस पराक्रम को अपनी आँखों से देखें।
 
King! I will conquer the entire earth including mountains, forests and jungles. The land which the four powerful Pandavas have conquered together, I will conquer it for you alone, there is no doubt about it. Bhishma, the enemy of Kurukula, who has a wrong intellect, should see this feat of mine with his own eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)