श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.253.2 
कर्णो वैकर्तनश्चैव शकुनिश्च महाबल:।
भीष्मद्रोणकृपाश्चैव तन्मे शंसितुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
सूर्यपुत्र कर्ण, महाबली शकुनि, भीष्म, द्रोण तथा कृपाचार्य ने क्या कर्म किये? कृपया मुझे यह बताइये॥ 2॥
 
What deeds did Suryaputra Karna, the mighty Shakuni, Bhishma, Drona and Kripacharya do? Kindly tell me this.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)