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mahabharat 3.253.16: कर्ण ने कहा—कुरुवंश के रत्न दुर्योधन! मैं जो कह रहा हूँ, उस पर ध्यान दो। भीष्म सदैव हमारी निन्दा और पाण्डवों की प्रशंसा करते हैं॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.253.16 
कर्ण उवाच
दुर्योधन निबोधेदं यत् त्वां वक्ष्यामि कौरव।
भीष्मोऽस्मान्निन्दति सदा पाण्डवांश्च प्रशंसति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा—कुरुवंश के रत्न दुर्योधन! मैं जो कह रहा हूँ, उस पर ध्यान दो। भीष्म सदैव हमारी निन्दा और पाण्डवों की प्रशंसा करते हैं॥ 16॥
 
Karna said—Duryodhan, the jewel of the Kuru clan! Pay attention to what I am telling you. Bhishma always criticizes us and praises the Pandavas.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)