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mahabharat 3.253.12: यह जानकर कि महाबली दुर्योधन अन्यत्र चला गया है, कर्ण और दुशासन जैसे महान धनुर्धर उसके पीछे चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.253.12 
तं तु प्रस्थितमाज्ञाय कर्णदु:शासनादय:।
अनुजग्मुर्महेष्वासा धार्तराष्ट्रं महाबलम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि महाबली दुर्योधन अन्यत्र चला गया है, कर्ण और दुशासन जैसे महान धनुर्धर उसके पीछे चले गये।
 
Knowing that the mighty Duryodhana had gone elsewhere, the great archers like Karna and Dushasan followed him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)