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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान
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श्लोक 11
श्लोक
3.253.11
एवमुक्तश्च भीष्मेण धार्तराष्ट्रो जनेश्वर:।
प्रहस्य सहसा राजन् विप्रतस्थे ससौबल:॥ ११॥
अनुवाद
राजा दुर्योधन भीष्म की बात सुनकर हँस पड़ा और शकुनि के साथ सहसा वहाँ से चला गया।
King! King Duryodhan laughed at Bhishma's words and suddenly went away from there along with Shakuni.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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