श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 253: भीष्मका कर्णकी निन्दा करते हुए दुर्योधनको पाण्डवोंसे संधि करनेका परामर्श देना, कर्णके क्षोभपूर्ण वचन और दिग्विजयके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.253.10 
तस्मादहं क्षमं मन्ये पाण्डवैस्तैर्महात्मभि:।
संधिं संधिविदां श्रेष्ठ कुलस्यास्य विवृद्धये॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अतः हे राजन! संधि करने वाले महापुरुषों में श्रेष्ठ! मैं इस कुल की उन्नति के लिए उन श्रेष्ठ पाण्डवों के साथ संधि करना उचित समझता हूँ।॥10॥
 
"Therefore, O king, the best among those experts in treaties! I think it is appropriate to enter into a treaty with those great Pandavas for the prosperity of this clan.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)