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mahabharat 3.252.48-49: धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन सम्राट के समान श्रेष्ठ ब्राह्मणों से विजय का आशीर्वाद सहित अपनी स्तुति सुनता हुआ तथा प्रजा का अभिवादन स्वीकार करता हुआ तेजोमय होकर आगे बढ़ा ॥48-49॥   |   mahabharat अध्याय 3.252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  3.252.48-49 
जयाशीर्भिर्द्विजेन्द्रै: स स्तूयमानोऽधिराजवत्॥ ४८॥
गृह्णन्नञ्जलिमालाश्च धार्तराष्ट्रो जनाधिप:।
सुयोधनो ययावग्रे श्रिया परमया ज्वलन्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन सम्राट के समान श्रेष्ठ ब्राह्मणों से विजय का आशीर्वाद सहित अपनी स्तुति सुनता हुआ तथा प्रजा का अभिवादन स्वीकार करता हुआ तेजोमय होकर आगे बढ़ा ॥48-49॥
 
King Duryodhana, the son of Dhritarashtra, proceeded forward in shining splendor, hearing his praises along with the blessings of victory from the best Brahmins like an emperor and receiving the salutations of the people. 48-49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)