श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.252.43 
गते त्रयोदशे वर्षे सत्येनायुधमालभे।
आनयिष्याम्यहं पार्थान् वशं तव जनाधिप॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! मैं धनुष को स्पर्श करके सत्यनिष्ठा से यह शपथ लेता हूँ कि तेरहवाँ वर्ष व्यतीत होते ही मैं पाण्डवों को आपके अधीन कर दूँगा ॥43॥
 
Maharaj! I touch the bow and take this oath with sincerity that as soon as the thirteenth year is over, I will bring the Pandavas under your control. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)