श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.252.41 
उत्तिष्ठ राजन् किं शेषे कस्माच्छोचसि शत्रुहन्।
शत्रून् प्रताप्य वीर्येण स कथं मृत्युमिच्छसि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के राजा! उठो, क्यों सो रहे हो? क्यों शोक कर रहे हो? अपने पराक्रम से शत्रुओं को व्यथित करके अब तुम मृत्यु की इच्छा क्यों कर रहे हो?॥ 41॥
 
King of the enemies! Wake up, why are you sleeping? Why are you mourning? Having tormented the enemies with your valour, why do you now desire death?॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)