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न कालोऽद्य विषादस्य भयस्य मरणस्य वा।
परिष्वज्याब्रवीच्चैनं भुजाभ्यां स महाभुज:॥ ४०॥
अनुवाद
‘यह शोक करने, डरने या मरने का समय नहीं है’ ऐसा कहकर महाबाहु कर्ण ने दुर्योधन को अपनी दोनों भुजाओं से खींचकर हृदय से लगा लिया और कहा-॥40॥
Saying, 'This is not the time to mourn, to be afraid or to die', the mighty-armed Karna pulled Duryodhana with both his arms and embraced him and said -॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥