श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.252.40 
न कालोऽद्य विषादस्य भयस्य मरणस्य वा।
परिष्वज्याब्रवीच्चैनं भुजाभ्यां स महाभुज:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘यह शोक करने, डरने या मरने का समय नहीं है’ ऐसा कहकर महाबाहु कर्ण ने दुर्योधन को अपनी दोनों भुजाओं से खींचकर हृदय से लगा लिया और कहा-॥40॥
 
Saying, 'This is not the time to mourn, to be afraid or to die', the mighty-armed Karna pulled Duryodhana with both his arms and embraced him and said -॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)