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mahabharat 3.252.4: हे राजन! तुम्हारे आत्महत्या के विचार धर्म, अर्थ, सुख, यश, कीर्ति और पराक्रम का नाश करने वाले हैं तथा तुम्हारे शत्रुओं के हर्ष को बढ़ाने वाले हैं। अतः इसे बंद करो।   |   mahabharat अध्याय 3.252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.252.4 
नियच्छैनां मतिं राजन् धर्मार्थसुखनाशिनीम्।
यश:प्रतापवीर्यघ्नीं शत्रूणां हर्षवर्धनीम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुम्हारे आत्महत्या के विचार धर्म, अर्थ, सुख, यश, कीर्ति और पराक्रम का नाश करने वाले हैं तथा तुम्हारे शत्रुओं के हर्ष को बढ़ाने वाले हैं। अतः इसे बंद करो।
 
O King! Your thoughts regarding suicide are going to destroy Dharma, Artha, happiness, fame, glory and valour and will increase the joy of your enemies. So stop it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)