श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.252.39 
न मृतो जयते शत्रूञ्जीवन् भद्राणि पश्यति।
मृतस्य भद्राणि कुत: कौरवेय कुतो जय:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! मरा हुआ मनुष्य अपने शत्रुओं पर कभी विजय नहीं पाता। जो जीवित है, वह कभी-कभी सुख के दिन देखता है। मरे हुए के लिए सुख कहाँ और विजय कहाँ?॥39॥
 
‘Kurunandan! A dead man never gains victory over his enemies. The one who is alive sometimes sees happy days. Where is happiness and where is victory for a dead person?॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)