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mahabharat 3.252.36-37h: महाराज! राक्षसों ने भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य के मन पर कब्ज़ा कर लिया था। इसलिए उनमें भी पांडवों के प्रति वैसा स्नेह नहीं रहा।   |   mahabharat अध्याय 3.252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  3.252.36-37h 
भीष्मद्रोणकृपाद्याश्च दानवाक्रान्तचेतस:॥ ३६॥
न तथा पाण्डुपुत्राणां स्नेहवन्तो विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
महाराज! राक्षसों ने भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य के मन पर कब्ज़ा कर लिया था। इसलिए उनमें भी पांडवों के प्रति वैसा स्नेह नहीं रहा।
 
King! The demons had taken over the minds of Bhishma, Drona and Kripacharya. Hence, they too did not have the same affection for the Pandavas. 36 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)