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mahabharat 3.252.34-35h: इस बीच कर्ण नरकासुर की आत्मा से ग्रस्त होकर अर्जुन को मारने का क्रूर संकल्प करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 3.252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  3.252.34-35h 
कर्णोऽप्याविष्टचित्तात्मा नरकस्यान्तरात्मना॥ ३४॥
अर्जुनस्य वधे क्रूरां करोति स्म तदा मतिम्।
 
 
अनुवाद
इस बीच कर्ण नरकासुर की आत्मा से ग्रस्त होकर अर्जुन को मारने का क्रूर संकल्प करने लगा।
 
Meanwhile Karna, being possessed by the soul of Narakasura, started making a cruel resolution to kill Arjuna. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)