श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  3.252.32-33h 
कर्णं संशप्तकांश्चैव पार्थस्यामित्रघातिन:॥ ३२॥
अमन्यत वधे युक्तान् समर्थांश्च सुयोधन:।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने मान लिया कि संशप्तक और कर्ण शत्रुसंहारक अर्जुन को मारने में लगे हुए हैं और वे ऐसा करने में समर्थ भी हैं ॥32 1/2॥
 
Duryodhana assumed that the Samshaptakas and Karna were engaged in killing the enemy-killer Arjuna and that they were capable of doing so. ॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)