श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.252.30 
प्रतिनिक्षिप्य तं वीरं कृत्या समभिपूज्य च।
अनुज्ञाता च राज्ञा सा तथैवान्तरधीयत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
कृत्या ने वीर राजा दुर्योधन को वहीं रोककर उनका आदर किया और उनकी अनुमति लेकर जैसे आई थीं, वैसे ही अंतर्धान हो गईं॥30॥
 
Keeping the valiant King Duryodhana there, Kritya showed respect to him and after taking his permission, disappeared just as she had come.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)