श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  3.252.15-16h 
व्याभाषमाणाश्चान्योन्यं न मे जीवन् विमोक्ष्यसे।
सर्वे शस्त्रास्त्रमोक्षेण पौरुषे समवस्थिता:॥ १५॥
श्लाघमाना: कुरुश्रेष्ठ करिष्यन्ति जनक्षयम्।
 
 
अनुवाद
वे सब योद्धा एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए कहेंगे कि, ‘आज तुम लोग मेरे हाथ से जीवित बच नहीं सकते।’ हे कौरवश्रेष्ठ! इस प्रकार सब लोग अपने पराक्रम में दृढ़ रहकर अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करते हुए और प्रजाजनों के संहार के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हुए रहेंगे।॥ 15 1/2॥
 
While speaking against one another, all those warriors will say, 'Today you cannot escape alive from my hands.' O best of the Kurus! In this way, all will remain steadfast in their valour, showering weapons and competing with one another to kill the people.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)