श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.252.14 
प्रहरिष्यन्ति विवशा: स्नेहमुत्सृज्य दूरत:।
हृष्टा: पुरुषशार्दूला: कलुषीकृतमानसा:।
अविज्ञानविमूढाश्च दैवाच्च विधिनिर्मितात्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म आदि वीर पुरुष (राक्षसों के क्रोध के कारण) अज्ञान से मोहित होकर मोहग्रस्त हो जाएँगे। उनके मन मलिन हो जाएँगे और वे स्नेह छोड़कर प्रसन्नतापूर्वक शस्त्रों से आक्रमण करेंगे। इसका कारण पूर्वनिर्धारित प्रारब्ध है॥ 14॥
 
Those brave men like Bhishma and other men will be helplessly deluded by ignorance (due to the fury of the demons). Their minds will become impure and leaving aside their affection, they will happily attack with weapons. The reason behind this is the predestined destiny.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)