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mahabharat 3.252.12-13: कौरवश्रेष्ठ! जब राक्षस कुपित होंगे, तब भीष्म, द्रोण आदि की आत्माओं को भी वे अपने वश में कर लेंगे। उस स्थिति में, युद्ध में बिना किसी स्नेह के आक्रमण करते हुए, वे अपने पुत्रों, भाइयों, पूर्वजों, सम्बन्धियों, शिष्यों, परिवारजनों, बच्चों और वृद्धों को भी नहीं छोड़ेंगे।   |   mahabharat अध्याय 3.252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 252: दानवोंका दुर्योधनको समझाना और कर्णके अनुरोध करनेपर दुर्योधनका अनशन त्याग करके हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.252.12-13 
नैव पुत्रान्न च भ्रातॄन्न पितॄन्न च बान्धवान्।
नैव शिष्यान्न च ज्ञातीन्न बालान् स्थविरान्न च॥ १२॥
युधि सम्प्रहरिष्यन्तो मोक्ष्यन्ति कुरुसत्तम।
नि:स्नेहा दानवाविष्टा: समाक्रान्तेऽन्तरात्मनि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कौरवश्रेष्ठ! जब राक्षस कुपित होंगे, तब भीष्म, द्रोण आदि की आत्माओं को भी वे अपने वश में कर लेंगे। उस स्थिति में, युद्ध में बिना किसी स्नेह के आक्रमण करते हुए, वे अपने पुत्रों, भाइयों, पूर्वजों, सम्बन्धियों, शिष्यों, परिवारजनों, बच्चों और वृद्धों को भी नहीं छोड़ेंगे।
 
Best of the Kurus! When the demons are enraged, the souls of Bhishma, Drona etc. will also be taken over by them. In that condition, while attacking without any affection in the war, they will not spare even their sons, brothers, ancestors, relatives, disciples, family members, children and the elderly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)