Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.251.6: तुम इसलिए दुःखी हो रहे हो क्योंकि पांडवों ने तुम्हारा सम्मान किया है। इसके विपरीत, यदि वे तुम्हारा अनादर करते, तो कौन जाने तुम्हारा क्या होता? शोक का सहारा लेकर कुंतीपुत्रों के अच्छे आचरण को नष्ट मत करो। | mahabharat अध्याय 3.251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्कृतस्य हि ते शोको विपरीते कथं भवेत्।
मा कृतं शोभनं पार्थै: शोकमालम्ब्य नाशय॥ ६॥
अनुवाद
तुम इसलिए दुःखी हो रहे हो क्योंकि पांडवों ने तुम्हारा सम्मान किया है। इसके विपरीत, यदि वे तुम्हारा अनादर करते, तो कौन जाने तुम्हारा क्या होता? शोक का सहारा लेकर कुंतीपुत्रों के अच्छे आचरण को नष्ट मत करो।
You are grieving because the Pandavas have honoured you. On the contrary, if they had disrespected you, who knows what would have happened to you? Do not ruin the good behaviour of Kunti's sons by resorting to grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥