य: समुत्पतितं हर्षं दैन्यं वा न नियच्छति।
स नश्यति श्रियं प्राप्य पात्रमाममिवाम्भसि॥ ४॥
अनुवाद
जो मनुष्य राजसी लक्ष्मी को पाकर भी अचानक आने वाले हर्ष या शोक पर नियंत्रण नहीं रखता, वह उसी प्रकार नष्ट हो जाता है, जैसे कच्चा मिट्टी का घड़ा पानी में गल जाता है। ॥4॥
A person who does not control sudden joy or sorrow, even after obtaining the royal goddess Lakshmi, gets destroyed in the same way as an unbaked earthen pot melts in water. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)