श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.251.27 
आहुर्दैत्याश्च तां तत्र सुप्रीतेनान्तरात्मना।
प्रायोपविष्टं राजानं धार्तराष्ट्रमिहानय॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब दैत्यों ने प्रसन्न मन से उससे कहा - 'यहाँ धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन को ले आओ, जो प्रायोपवेश का अनुष्ठान कर रहे हैं।'॥ 27॥
 
Then the demons said to him with a pleased heart, 'Bring here King Duryodhana, son of Dhritarashtra, who is observing the ritual of Prayopavesh.'॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)