Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.251.26: राजन! अनुष्ठान पूरा होने पर यज्ञाग्नि से एक अत्यन्त अद्भुत कृत्या प्रकट हुई और जम्हाई लेते हुए बोली - 'मैं क्या करूँ?'॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.251.26 
कर्मसिद्धौ तदा तत्र जृम्भमाणा महाद्‍भुता।
कृत्या समुत्थिता राजन् किं करोमीति चाब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! अनुष्ठान पूरा होने पर यज्ञाग्नि से एक अत्यन्त अद्भुत कृत्या प्रकट हुई और जम्हाई लेते हुए बोली - 'मैं क्या करूँ?'॥ 26॥
 
King! After the accomplishment of the ritual, a very wonderful Kritya appeared from the sacrificial fire, yawning, and said, 'What should I do?'॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)