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mahabharat 3.251.12-13: कर्ण और शकुनि की बातें सुनकर राजा दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और लज्जा से व्याकुल होकर उसे बड़ी निराशा हुई ॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 3.251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.251.12-13 
कर्णसौबलयोश्चापि संश्रुत्य वचनान्यसौ॥ १२॥
निर्वेदं परमं गत्वा राजा दुर्योधनस्तदा।
व्रीडयाभिपरीतात्मा नैराश्यमगमत् परम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण और शकुनि की बातें सुनकर राजा दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और लज्जा से व्याकुल होकर उसे बड़ी निराशा हुई ॥12-13॥
 
On hearing the words of Karna and Shakuni, King Duryodhana became very sad and, overwhelmed with shame, he felt great despair. ॥12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)