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mahabharat 3.251.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात, जल से पेट भरकर आमरण अनशन पर बैठे हुए राजा दुर्योधन को सान्त्वना देते हुए सुबलपुत्र शकुन्य ने कहा - 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.251.1 
वैशम्पायन उवाच
प्रायोपविष्टं राजानं दुर्योधनममर्षणम्।
उवाच सान्त्वयन् राजञ्छकुनि: सौबलस्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात, जल से पेट भरकर आमरण अनशन पर बैठे हुए राजा दुर्योधन को सान्त्वना देते हुए सुबलपुत्र शकुन्य ने कहा - 1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, while consoling King Duryodhana, who was sitting on fast unto death after filling his stomach with water, Shakunya, the son of Subal, said: 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)