Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.250.8-9: आज आप पांडवों के सभी रत्नों का उपभोग कर रहे हैं; लेकिन देखिए पांडव कितने धैर्यवान हैं कि उन्होंने कभी भी मृत्युपर्यंत उपवास नहीं किया। इसलिए हे महाबाहो! इस प्रकार दुःखी होने से कोई लाभ नहीं है। हे राजन! उठिए, आपका कल्याण हो। अब हमें यहाँ और विलम्ब नहीं करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 3.250: कर्णके समझानेपर भी दुर्योधनका आमरण अनशन करनेका ही निश्चय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाण्डवेयानि रत्नानि त्वमद्याप्युपभुञ्जसे॥ ८॥
सत्त्वस्थान् पाण्डवान् पश्य न ते प्रायमुपाविशन्।
(तदलं ते महाबाहो विषादं कर्तुमीदृशम्।)
उत्तिष्ठ राजन् भद्रं ते न चिरं कर्तुमर्हसि॥ ९॥
अनुवाद
आज आप पांडवों के सभी रत्नों का उपभोग कर रहे हैं; लेकिन देखिए पांडव कितने धैर्यवान हैं कि उन्होंने कभी भी मृत्युपर्यंत उपवास नहीं किया। इसलिए हे महाबाहो! इस प्रकार दुःखी होने से कोई लाभ नहीं है। हे राजन! उठिए, आपका कल्याण हो। अब हमें यहाँ और विलम्ब नहीं करना चाहिए।
Today you are consuming all the gems that the Pandavas had; however, see how patient the Pandavas are that they never fasted till death. Therefore, O mighty-armed one! There is no use in your being sad like this. O King! Get up, may you be blessed. Now we should not delay here any longer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥