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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 250: कर्णके समझानेपर भी दुर्योधनका आमरण अनशन करनेका ही निश्चय
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श्लोक 10
श्लोक
3.250.10
अवश्यमेव नृपते राज्ञो विषयवासिभि:।
प्रियाण्याचरितव्यानि तत्र का परिदेवना॥ १०॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! राजा के राज्य में रहने वाले लोगों को वही कार्य करने चाहिए जो उसे प्रिय हों। फिर इसमें शोक या शोक करने की क्या बात है?॥10॥
O Lord of men! The people living in the kingdom of the king must do the things which are liked by him. So what is there to regret or lament over?॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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