Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.25.19: वैशम्पायनजी कहते हैं: 'जनमेजय! तपस्वी मुनियों के बीच अपने मित्रों के साथ बैठे हुए धर्मराज युधिष्ठिर से उपर्युक्त वचन कहकर महर्षि मार्कण्डेय धौम्य तथा समस्त पाण्डवों से विदा लेकर उत्तर दिशा की ओर चले। | mahabharat अध्याय 3.25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं: 'जनमेजय! तपस्वी मुनियों के बीच अपने मित्रों के साथ बैठे हुए धर्मराज युधिष्ठिर से उपर्युक्त वचन कहकर महर्षि मार्कण्डेय धौम्य तथा समस्त पाण्डवों से विदा लेकर उत्तर दिशा की ओर चले।
Vaishmpayana says: 'Janamejaya! After saying the above words to Dharmaraja Yudhishthira, who was sitting with his friends among the ascetic saints, Maharishi Markandeya took leave from Dhoumya and all the Pandavas and proceeded towards the north.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्वैतवनप्रवेशे पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्वैतवनप्रवेशविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥