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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.25.18 
यथाप्रतिज्ञं च महानुभाव
कृच्छ्रं वने वासमिमं निरुष्य।
तत: श्रियं तेजसा तेन दीप्ता-
मादास्यसे पार्थिव कौरवेभ्य:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार वनवास की इस कठिन अवधि को पूरा करने के बाद आप कौरवों के हाथों से अपनी सुप्रतिष्ठित राजसी देवी लक्ष्मी को पुनः प्राप्त करेंगे।
 
O noble king! After completing this arduous period of exile as per your promise, you will regain your illustrious royal goddess Lakshmi from the hands of the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)