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mahabharat 3.249.d1-41: हे राजन! आप यहाँ मृत्युपर्यन्त उपवास करके बैठे हैं और आपके अपने भाई शोक और शोक में डूबे हुए हैं। उन्हें दुःखी करने से कोई लाभ नहीं है। आपका कल्याण हो। उठिए, आइए और अपने भाइयों को आश्वासन दीजिए।॥41॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक d1-41
 
 
श्लोक  3.249.d1-41 
विषण्णास्तव सोदर्यास्त्वयि प्रायं समास्थिते।
(तदलं दु:खितानेतान् कर्तुं सर्वान्नराधिप॥ )
उत्तिष्ठ व्रज भद्रं ते समाश्वासय सोदरान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आप यहाँ मृत्युपर्यन्त उपवास करके बैठे हैं और आपके अपने भाई शोक और शोक में डूबे हुए हैं। उन्हें दुःखी करने से कोई लाभ नहीं है। आपका कल्याण हो। उठिए, आइए और अपने भाइयों को आश्वासन दीजिए।॥41॥
 
‘O King! You are sitting here fasting till death and your own brothers are drowned in grief and sorrow. There is no use in making them sad. May you be blessed. Get up, come and assure your brothers.’॥ 41॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि दुर्योधनप्रायोपवेशे एकोनपञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें दुर्योधनप्रायोपवेशनविषयक

दो सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४९॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४१ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)