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mahabharat 3.249.9-10h: यदि मैं किसी गन्धर्व के द्वारा मारा गया होता, तो इस पृथ्वी पर मेरी कीर्ति विख्यात हो जाती और मैं इन्द्रलोक में शाश्वत पवित्र धाम को प्राप्त होता ॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.249.9-10h 
भवेद् यश: पृथिव्यां मे ख्यातं गन्धर्वतो वधात्॥ ९॥
प्राप्ताश्च पुण्यलोका: स्युर्महेन्द्रसदनेऽक्षया:।
 
 
अनुवाद
यदि मैं किसी गन्धर्व के द्वारा मारा गया होता, तो इस पृथ्वी पर मेरी कीर्ति विख्यात हो जाती और मैं इन्द्रलोक में शाश्वत पवित्र धाम को प्राप्त होता ॥9 1/2॥
 
Had I been killed by a Gandharva, my fame would have become renowned on this earth and I would have attained eternal holy abode in Indraloka. ॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)