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mahabharat 3.249.39: हे राजन! पाण्डवों ने आपको गन्धर्वों के हाथों से बचाकर अपना कर्तव्य पूरा किया है। राजा के राज्य में रहने वालों को सदैव उससे प्रेम करना चाहिए। 39.   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.249.39 
कर्तव्यं हि कृतं राजन् पाण्डवैस्तव मोक्षणम्।
नित्यमेव प्रियं कार्यं राज्ञो विषयवासिभि:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पाण्डवों ने आपको गन्धर्वों के हाथों से बचाकर अपना कर्तव्य पूरा किया है। राजा के राज्य में रहने वालों को सदैव उससे प्रेम करना चाहिए। 39.
 
O King! The Pandavas have only fulfilled their duty by rescuing you from the hands of the Gandharvas. Those who live in the kingdom of a king should always love him. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)