Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.249.37-38: जब शोक करने वाले का दुःख उस पर आई विपत्ति को दूर नहीं कर सकता, तो उसकी क्या शक्ति? तुम दोनों भाई शोक करके यह स्वयं देख रहे हो। इसलिए धैर्य रखो। शोक करके तुम अपने शत्रुओं का ही आनंद बढ़ाओगे। | mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा च शोचत: शोको व्यसनं नापकर्षति॥ ३७॥
सामर्थ्यं किं तत: शोके शोचमानौ प्रपश्यथ:।
धृतिं गृह्णीत मा शत्रून् शोचन्तौ नन्दयिष्यथ:॥ ३८॥
अनुवाद
जब शोक करने वाले का दुःख उस पर आई विपत्ति को दूर नहीं कर सकता, तो उसकी क्या शक्ति? तुम दोनों भाई शोक करके यह स्वयं देख रहे हो। इसलिए धैर्य रखो। शोक करके तुम अपने शत्रुओं का ही आनंद बढ़ाओगे।
When the grief of the mourner cannot ward off the calamity that has befallen him, then what power does he have? You two brothers are seeing this for yourself by mourning. So, be patient. By mourning you will only increase the joy of your enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥