श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  3.249.36-37h 
विषीदथ: किं कौरव्यौ बालिश्यात् प्राकृताविव॥ ३६॥
न शोक: शोचमानस्य विनिवर्तेत कर्हिचित्।
 
 
अनुवाद
हे कुरुकुल के श्रेष्ठ वीर! तुम दोनों मूर्खों की भाँति इस प्रकार क्यों कुढ़ रहे हो? शोक में डूबे रहने से मनुष्य का शोक कभी दूर नहीं होता। 36 1/2॥
 
The best hero of Kurukula! Why are you both sulking so foolishly like idiots? A person's grief never goes away by remaining immersed in grief. 36 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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