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mahabharat 3.249.34-35h: "भैया! आप सौ वर्षों तक हमारे कुल के राजा रहेंगे।" जनमेजय! ऐसा कहकर दु:शासन अपने बड़े भाई के आदरणीय चरण पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगा।   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  3.249.34-35h 
त्वमेव न: कुले राजा भविष्यसि शतं समा:।
एवमुक्त्वा स राजानं सुस्वरं प्ररुरोद ह॥ ३४॥
पादौ संस्पृश्य मानार्हौ भ्रातुर्ज्येष्ठस्य भारत।
 
 
अनुवाद
"भैया! आप सौ वर्षों तक हमारे कुल के राजा रहेंगे।" जनमेजय! ऐसा कहकर दु:शासन अपने बड़े भाई के आदरणीय चरण पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगा।
 
"Brother! You will be the king of our clan for a hundred years." Janamejaya! Having said this, Dushasan started crying profusely holding the respected feet of his elder brother. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)