Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.249.28-30: दुर्योधन के ये वचन सुनकर दु:शासन का गला रुँध गया। वह अत्यन्त दुःखी होकर हाथ जोड़कर अपने बड़े भाई के चरणों में गिर पड़ा और रुँधे हुए स्वर तथा दुःखी मन से बोला, 'भैया! क्या आप प्रसन्न हैं?' ऐसा कहकर वह भूमि पर लोट गया और शोक से व्याकुल होकर पुरुषश्रेष्ठ दु:शासन ने दुर्योधन के चरणों पर आँसू बहाते हुए कहा, 'नहीं, ऐसा नहीं होगा।' | mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधन के ये वचन सुनकर दु:शासन का गला रुँध गया। वह अत्यन्त दुःखी होकर हाथ जोड़कर अपने बड़े भाई के चरणों में गिर पड़ा और रुँधे हुए स्वर तथा दुःखी मन से बोला, 'भैया! क्या आप प्रसन्न हैं?' ऐसा कहकर वह भूमि पर लोट गया और शोक से व्याकुल होकर पुरुषश्रेष्ठ दु:शासन ने दुर्योधन के चरणों पर आँसू बहाते हुए कहा, 'नहीं, ऐसा नहीं होगा।'
On hearing these words of Duryodhan, Dushasan's throat became choked. Overcome with great grief, he fell at the feet of his elder brother with folded hands and said in a choked voice and with a pained mind, 'Brother! Are you happy?' Saying so, he rolled on the ground and, overcome with grief, the best of men, Dushasan, pouring his tears on the feet of Duryodhan, said, 'No, this will not happen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥