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mahabharat 3.249.26-27: ‘जैसे भगवान विष्णु देवताओं पर दया करते हैं, वैसे ही तुम्हें भी अपने परिवारजनों का ध्यान रखना चाहिए और बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए। अच्छा, अब जाओ और अपने सभी मित्रों को प्रसन्न करके तथा शत्रुओं को फटकार लगाकर अपने विजित देश की रक्षा करो।’ ऐसा कहकर दुर्योधन ने दु:शासन को गले लगा लिया और रुँधे हुए स्वर से कहा- ‘जाओ’।   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  3.249.26-27 
ज्ञातींश्चाप्यनुपश्येथा विष्णुर्देवगणान् यथा।
गुरव: पालनीयास्ते गच्छ पालय मेदिनीम्॥ २६॥
नन्दयन् सुहृद: सर्वान् शात्रवांश्चावभर्त्सयन्।
कण्ठे चैनं परिष्वज्य गम्यतामित्युवाच ह॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे भगवान विष्णु देवताओं पर दया करते हैं, वैसे ही तुम्हें भी अपने परिवारजनों का ध्यान रखना चाहिए और बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए। अच्छा, अब जाओ और अपने सभी मित्रों को प्रसन्न करके तथा शत्रुओं को फटकार लगाकर अपने विजित देश की रक्षा करो।’ ऐसा कहकर दुर्योधन ने दु:शासन को गले लगा लिया और रुँधे हुए स्वर से कहा- ‘जाओ’।
 
‘Just as Lord Vishnu has compassion on the gods, you should also take care of your family members and obey your elders. Well, now go and protect your occupied land by making all your friends happy and reprimanding your enemies.’ Saying this, Duryodhana embraced Dushasan and said with a choked voice – ‘Go’.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)